Thursday, 4 July 2019

चंद्रयान सरसी छंद

चंद्रयान विषय मा सरसी छंद

चंद्रयान   चन्दा  मा   जाही , भारत   पाही    मान।
नवा नवा  विद्या ला पाके , बड़ही   गाँव   किसान।।

अमेरिका  अउ रूस पहुँच गे , दूर गगन के  छाँव।
हमर  तिरंगा   घलु  लहराही , वो  चन्दा   के गाँव।।

जनता तक सब बात पहुँचही,आही शैक्षिक क्रांति।
मौसम के सन्देशा मिलही , सुन ओ भउजी  शांति।।

सीमा मा  बइठे  जवान मन , शोर  लिहीं  तत्काल।
कम्प्यूटर  मा  देख  जानही , बइरी के  सब चाल।।

देश  तरक्की  के  उदीम हे , चंद्रयान     अभियान।
विनती करथौं येला खच्चित,सफल करय भगवान।।

साधक : विरेन्द्र कुमार साहू

*यान विषय मा "बालकविता" सरसी छंद*

पढ़ लिखके बिग्यानी बनहूँ , यान बनाहूँ एक।
चढ़के ओमा दुनिया घुमहूँ , जाहूँ देश अनेक।।

जाहूँ चन्दा मामा के घर , चढ़के  सुग्घर  यान।
टेस मारके  गाना  गाहूँ , अपन दिखाहूँ  शान।।

लेहूँ  टोपी  चश्मा पनही , कुरता  छिटही  रंग।
लुका-छुपी के खेल खेलहूँ , बादर  भैया संग।।

टोर टोर सब तारा मन ला , रखहूँ अपने जेब।
बेंच बेंच के ओकर बदला , घात बिसाहूँ सेब।।

मामी चंदैनी रोटी ला , दिही  दूध   मा   बोर।
खाहूँ चप्पर - चप्पर  मैंहा , दूनो हाथ चिभोर।।

छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
        ग्राम बोडराबांधा(पाण्डुका)
   वि.स. राजिम जि. गरियाबंद(छ.ग.)

बाढ़त गरमी


बाढ़त गरमी सरसी छंद मा

गनगन  गनगन  चढ़गे  पारा , थर्रागे     संसार।
बाढ़त  गरमी  काखर सेती,साथी  करौ बिचार।।

पिघलत हावै बरफ पहाड़ी,मुश्किल लेवइ साँस।
आनी-बानी बिपदा सेती ,कतको जीव  उदास।।

चेत  करौ  अभ्भो  बाँचे हे , होय  नहीं  हे  देर।
अब ले तब अउ ज्यादा होही ,आँखी देहु नटेर।।

जतन करौ जंगल पानी के ,तभ्भे  बँचही  प्रान।
छोड़ सुवारथ पेड़ लगाओ ,हरियर करौ जहान।।

धुआं बढ़ाथे तिपनी भारी ,अउ  फइलाथे रोग।
बिना प्रदूषण नवा ढंग ले , लगे  सबे   उद्योग।।

बाग बगीचा  गाँव-गाँव मा , बनवावौ  सरकार।
बाढ़त तिपनी खातिर येहर,आज हवय दरकार।।

जम्मों सरकारी आफिस मा,भेजौ  ए फरमान।
पेड़ लगाओ विश्व बचाओ ,लेवौ  कर अनुदान।।

साधक : विरेन्द्र कुमार साहू