Friday, 17 August 2018

दर्शनीय स्थल : जतमाई धाम



शीर्षक : दर्शनीय स्थल : जतमाई धाम


छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण प्रदेश है। यहाँ की हरी-भरी वादियाँ लोगों को बरबस ही मोहित कर लेती हैं। पर्वत, पठार,नदियाँ व जंगल की विद्यमानता इनकी शोभा में चार चाँद लगाती हैं। सुंदर वादियों के बीच में पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल व अभ्यारण्य लोगों को यहाँ बार-बार आने के लिए आतुर करता है। ऐसे ही एक दर्शनीय स्थल है- जतमाई धाम। जी हाँ ! जतमाई धाम।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 75 कि. मी. की दूरी पर गरियाबंद जिले की मनोरम वादियों के बीच अवस्थित प्राकृतिक व धार्मिक महत्व का स्थल है जतमाई धाम। पहाड़ों को लाँघता हुआ सर्पाकार ,घुमावदार पहुँच मार्ग जहाँ भ्रमण का अनोखा आनंद प्रदान करता है ,वहीं चिड़ियों की चहचहाहट जंगलों के बीच में निर्वेद संगीत का एहसास कराती है। हिरण ,नीलगाय जैसे जंगली जीवों से साक्षात्कार जीवन में एक नया अनुभव प्रदान करता है।सकल मनोरथ पूरणीय माता जतमाई का निवास झरझर झरती 70-75 फिट की जलप्रपात के मध्य में एक गुफानुमा स्थान में है,जो लौकिक होकर अलौकिकता की अनुभव कराती है।

पहाड़ों के ऊपर से बहकर आती जलधाराएं माँ की महिमा गाने मानो दौड़ीं चली आ रही हैं,प्रतीत होता है। माता जी की दर्शन करके नीचे उतरते हैं तो एक मनमोहक कुंड में स्नान का अद्भुत आनंद भी ले सकते हैं। कुंड से बहती जलधाराओं के साथ हम 200-300 मीटर आगे बढ़ते हैं तो माँ भवानी जतमाई के सवारी सिंह का प्राकृतिक आवास "सिंहगुफा" का भी दर्शन पा सकते हैं।

माता जतमाई आदिशक्ति माता का ही एक रूप है। यहाँ वर्ष में दो बार चैत्र नवरात्रि व शारदीय नवरात्रि में विशाल मेला लगता है ।


प्रदेश ही नही बल्कि देश-विदेश से भी दर्शनार्थी आते हैं , तथा मनोकामना पूर्ति के लिए ज्योति कलश भी जलाते हैं। प्राकृतिक-सौंदर्य दर्शन के साथ में देवी-कृपा को प्राप्त करने की आशा से प्रतिदिन हजारों की संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं। माता जी के धाम से ठीक 2-3 किलोमीटर पहले एक विशाल जलाशय है, जिसे तौरेंगा बाँध के नाम जाना जाता है ,लोग यहाँ पर पिकनिक मनाने के उद्देश्य से आते हैं। नौका-विहार करके जलाशय भ्रमण का लुत्फ़ भी उठाते हैं।


माता जतमाई के धाम से आगे बढ़े तो 6-7 किलोमीटर की दूरी पर प्रकृति की गोद में बसा एक और दर्शनीय स्थल घटारानी धाम है, जहाँ की शोभा अद्वितीय है ।

कलकल बहते झरने, ऊँचे-ऊँचे पेड़-पौधे, कलरव करती खग श्रेणी,उछलते कूदते बंदर आनंद की अनुभूति कराते हैं।

जतमाई धाम पहुँचने के लिए रायपुर  से अभनपुर राजिम होते हुए ,रायपुर गरियाबंद मुख्यमार्ग में पाण्डुका नामक छोटे से कस्बे में चारोधाम चौक से पूर्व दिशा की ओर 11-12 किलोमीटर की यात्रा में  रजनकटा,अतरमरा ,कुम्हरमरा नामक ग्रामों से होते हुए तौरेंगा जलाशय एवं माता जतमाई के दरबार पहुंचते हैं।

ऋषि-मुनियों के निवास -स्थान कैसे थे? जंगलों में आनंद की अनुभूति कैसी होती होगी?
जंगली जीवों से साक्षात्कार का रोमांचक अनुभव करना चाहते हैं? व पर्वत ,पठार,झरने, जंगल, जलाशय एवं माता जी का दर्शन लाभ एक साथ लेना चाहते हैं?

तो जरूर आइए! विविधताओं के गढ़ ,छत्तीसगढ़ की इन मनोरम वादियों में आपका स्वागत है।

Saturday, 11 August 2018

ये प्रीत गीत

ये प्रीत गीत
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सुहाने गीत
हरपल गाऊंगा
बन जा मीत

सुर संगीत
मेरी है यह रीत
बन जा प्रीत

नैनों पलक
बिठाऊंगा तुमको
सांसों तलक

तेरे सपने
मानूंगा मैं सदा ही
मेरे सपने

सुनले यार
होकर वफादार
निभाना प्यार

बन बहार
मौसम ए जिंदगी
हो गुलज़ार

आ बांहों में
कांटे नही चुभेंगे
तेरी राहों में

मन सभीत
पर लिखता तुझे
ये प्रीत गीत

रचना: विरेन्द्र कुमार साहू
       बोडराबांधा (पाण्डुका)
          9993690899




आँखें

आँख मारकर उससे, मैंने आँखें चार की।
आँख खुली तो देखा, उसने आँखों से वार किया॥

आँख हमारी आयी तो ,आँखे फेर कर चली गई।
आँख मिला न सकी वो,आँख हमसे मली गई॥

आँखें बिछाकर बैठे थे हम, आँखें पथरा गई।
आँखें बदल गई उनकी, आँखें दिखाकर भाग गई॥

कभी आँख के पुतली थे, अब आँखों के कांटे हैं।
आँखें बचाकर हमसे वो, हमपें ही आँखें गड़ाते हैं॥

आँख उठाकर देखती क्या,उसकी आँखे नीचे हो गई।
मेरे आंखों में गिरकर,उसकी आँखों में नीर भर गई॥

हमने आँखें मुंद ली तो,आँखें मिलाने आ गई।
आँख लगाकर हमको वह,आँख सेककर चली गई॥


रचना : विरेन्द्र कुमार साहू
        बोड़राबांधा (पाण्डुका)
        जिला -गरियाबंद(छ. ग.)
       08/08/2018