ममता" पर दोहे:-विरेन्द्र कुमार साहू*
ममता करुणा प्रेम का , माँ अनुपम भंडार।
बड़ा ईश से ईश का , है अमूल्य उपहार।।
दुनिया में अनमोल है , माँ का ममता रूप।
पाने को लोलुप सदा , दनुज मनुज सुर भूप।।
रखते निज दिल में सभी,ममता विविध प्रकार।
कुछ की ममता माल पर,कुछ की घर-परिवार।।
कर्मठ ममता लक्ष्य प्रति,काहिल ममता भाग्य।
नाविक साहिल से रखे,कवि की ममता काव्य।।
ममता रखे सुवर्ण पर , माँ वाणी के दास।
सोच समझकर अनवरत ,कविता रचे झकास।।
छंदकार :-
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
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