विषय :- अहंकार
विधा :- दोहा छंद
नदियाँ पीये ना कभी , अपना निर्मल नीर।
औरों को दे जिंदगी , वह है सच्चा वीर।।
अहंकार है रोग सम , होता शून्य विवेक।
पीड़ित समझे आप को, मुझसा नहीं अनेक।।
अहंकार के जाल फँस , मत करना मनु भूल।
मिलकर मिट्टी एक दिन , सबको होना धूल।।
धन दौलत भंडार का , अहंकार है भूल।
धर्मराज के द्वार में , ये सब मिट्टी धूल।।
अहंकार को त्याग कर , करलो सबसे प्यार।
मनु जीवन का सार है , परसेवा उपकार।।
अहंकार जिसने किया , खोया घर जन अर्थ।
कहता हूँ मैं इसलिए , अहंकार है व्यर्थ।।
विषय :- साहस
विधा :- छंद (दोहा )
तपसी त्यागी वीर का , साहस सच्चा मित्र।
महका दे ये जिंदगी , बनकर अनुपम इत्र।।
कुछ ना करने से भला , करो साहसिक काम।
मिलता है बनकर विजय , साहस का परिणाम।।
बाद हार के जीत है , जीवन इक संग्राम।
जिसने भी साहस किया , पाया लक्ष्य तमाम।।
परम सफल इंसान का , बनना है पर्याय।
कठिन साधना साथ में , साहस नेक उपाय।।
करके साहस लक्ष्य प्रति , लेता जोखिम भार।
मिलता है परिणाम भी , साहस के अनुसार।।
छंदकार :-
कवि - विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
No comments:
Post a Comment