भय अउ भ्रष्टाचार के , लमियावय झन नार।
मैं चाहत हौं देश मा , बनय ठोस सरकार॥
मैं चाहत हौं काव्य मा , रहय एक संदेश।
ठकुरसुहाती बंद हो , हो जन पीड़ा पेश॥
बिजली पानी अउ सड़क , होय गाँव के पास।
मैं चाहत हौं गाँव के , सुग्घर होय विकास॥
मैं चाहत हौं देश ले , भागे भ्रष्टाचार॥
सत्ता के उपचार बर , बन गिस भीम हकीम।
लोकतंत्र ला दृढ़ करिस , सब बोलो जय भीम॥
पंखा कूलर हे चलत , घर मा दिन अउ रात।
गरमी ले राहत नहीं , ये संसो के बात॥
करम करे के टेम मा , सोये चादर तान।
बिरथा मानुष तन गवाँ , पहुँच गेस शमशान॥
बेर बुलक गे तोर तब , होगे मरे बिहान।
जाँगर खँग गे तोर तब , करबे काय सियान।।
योगा करव बिहान मा , रहिहौ सदा निरोग।
तन मन धन सब बाँचही , सुग्घर जिनगी भोग॥
रसना मीठा होय ले , बने मितान अनेक।
बिनता बिगड़े बोल ला , बाहिर कोती फेक।।
मत के दान सबे करव , होय सबल गणतंत्र।
स्वच्छ सुदृढ़ सरकार बर , येला जानव मंत्र॥
याद रखव मतदान हा , आय पुण्य के काम।
अइसन अवसर लाभ ला , झन कर लेके दाम॥
मेरा अभिमत काव्य में , रहे एक संदेश।
ठकुरसुहाती बंद हो , हो जन-पीड़ा पेश॥
बिजली पानी अउ सड़क , होय गाँव के तीर।
मैं चाहत हौं गाँव के , बदलय जी तकदीर॥
फाँफा फुदकय नार जब , धनहा डोली खेत।
फसल बचाये बर बबा , रहिहौ तुमन सचेत॥
हरियर भुरवा रंग मा , फाँफा मिलय अनेंक।
बारी बखरी झन घुसे , उनकर रसता छेंक॥
(फाँफा शब्द के प्रयोग बस होय हे)
बड़ जीपरहा कोकड़ा , फाँफा बिन-बिन खाय।
लालच फाँफा खाय के , जाला मा फँस जाय॥
खून पसीना जब बहे , झूमय नाचय खार।
माटी ला सोना करय , मेहनती बनिहार॥
पाही मान जहान मा , जब बनिहार किसान।
तभ्भे तो सिरतोन मा , आही नवा बिहान॥
विरेन्द्र कुमार साहू बोडराबांधा राजिम
रतिहा के बाँचे भात मा , डारव पानी थोर।
नून डार ले स्वाद बर , बासी खाव चिभोर।।
राजनीति सफियाय बर , जनता लेवय भार।
जनसेवक ला चून के , पहिनावय जी हार॥
कलम चलाबो देश बर , लिखबो जन के बात।
अलख जगाबो गाँव मा , भूल जात अउ पात॥
नशा नाश के जड़ हरे , जिनगी करय खराब।
बाँचव येकर ले सदा , पीयव नहीं शराब॥
यमुना काटे पाप ला , हरय सकल अज्ञान।
जाके ओखर घाट मा , करलो संगी स्नान॥
राजनीति सफियाय बर , जनता लेवय भार।
जनसेवक ला चून के , पहिनावय जी हार॥
सरग बरोबर सुख मिले , मन मा छाये मोद।
सब सुख फीका सामने , हो जब माँ के गोद॥
महुआ रस मा मात के , कर डारे तन नाश।
तन ला अपन बिगाड़ के , फँसगे यम के पाश॥
महूँ अभागा हँव भिड़े , मन मा लेके आस।
गुरुवर कृपा प्रताप ले , बनहूँ कवि मैं खास॥
छंदकार :-
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
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