Thursday, 27 June 2019

आँसू पर दोहे


विषय : आँसू
विधा : दोहा छंद

मैं   हूँ   आँसू आँख का , मेरा   रंग  अनेक।
है  महत्व   मेरा  बड़ा , कहते   हैं    प्रत्येक।।

आते  आँसू  आँख में , लेकर   हर्ष  विषाद।
है  यह  मोती  कीमती , करना  मत बरबाद।।

आते माँ की आँख जो , बनकर प्रेम निशान।
आँसू  ममता   रूप   में , पाता  है   पहचान।।

आँसू को पहचानिए , दुख का  सच्चा मित्र।
यहाँ सभी  देते  दगा  , है  यह  बात विचित्र।।

घड़ियाली आँसू बहा , किया गलत है काम।
ऐसे  जन  ने  कर दिए  , आँसू को बदनाम।।

चिड़िया ही देखी नहीं , जिसकी ना हो पाँख।
बिन  आँसू  देखी नहीं , जग में  कोई  आँख।।

स्नेह  लुटाना  जानता , आँसू  दुखिया  संग।
गिरता  ज्यों बरसात  में , झरझर नीर  मतंग।।

रचनाकार :
नाम : विरेन्द्र कुमार साहू
पता : ग्राम-बोड़राबांधा(राजिम)
        जिला-गरियाबंद(छ.ग.)
मो. : 9993690899


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