विषय : आँसू
विधा : दोहा छंद
मैं हूँ आँसू आँख का , मेरा रंग अनेक।
है महत्व मेरा बड़ा , कहते हैं प्रत्येक।।
आते आँसू आँख में , लेकर हर्ष विषाद।
है यह मोती कीमती , करना मत बरबाद।।
आते माँ की आँख जो , बनकर प्रेम निशान।
आँसू ममता रूप में , पाता है पहचान।।
आँसू को पहचानिए , दुख का सच्चा मित्र।
यहाँ सभी देते दगा , है यह बात विचित्र।।
घड़ियाली आँसू बहा , किया गलत है काम।
ऐसे जन ने कर दिए , आँसू को बदनाम।।
चिड़िया ही देखी नहीं , जिसकी ना हो पाँख।
बिन आँसू देखी नहीं , जग में कोई आँख।।
स्नेह लुटाना जानता , आँसू दुखिया संग।
गिरता ज्यों बरसात में , झरझर नीर मतंग।।
रचनाकार :
नाम : विरेन्द्र कुमार साहू
पता : ग्राम-बोड़राबांधा(राजिम)
जिला-गरियाबंद(छ.ग.)
मो. : 9993690899
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