Thursday, 27 June 2019

छत्तीसगढ़ी गजल


विधा : गजल
भाषा : छत्तीसगढ़ी

मयारू  मोर  मया वाली मया  करथे जबर जी ओ।
करत रहिथे फिकर नंगत लेवत रहिथे खबर जी ओ।

कहां पाहूं ओकर कस अउ सोचत रहिथो गजब के मैं।
मया  मा  मैं  बिमरहा  ता दवा  दारू असर  जी ओ।

बिछुड़ना काली राती कस मिलन चंदा अँजोरी अस।
हँसत कट जाय बस अइसन हरे पथ के सफर जी ओ।

कटे नइ बिन मयारू के घड़ी  जिनगी के अब मोरो।
विरह हे राह कँटहा ता मिलन सुग्घर डगर जी ओ।

करय अंतस गजब ठंडक  सबे मौसम औ बादर मा।
मयारू *"वीर"* के सौंहत सुहाती पल पहर जी ओ।।

रचना : विरेन्द्र कुमार साहू "वीर"
            बोड़राबांधा (राजिम)
      जिला - गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
          मो. 9993690899

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