Thursday, 27 June 2019

संगीतकार खुमान साव जी ला श्रद्धांजलि


छप्पय छंद मा ब्रह्मलीन संगीत साधक खुमान जी ला काव्यांजलि

रोवत    तबला   ताल , मोहरी   कल्हरत  हावै।
नाल   हाल   बेहाल , बाँसुरी     कलपत   हावै।
ढोलक   टासक   झाँझ , मांदरी  गुन-गुन बोले।
हारमोनियम   राग , बात    अन्तस    के  बोले।
सुसकत जम्मों साज हा,लोककला के शान के।
ढारय आँसू मन हृदय , सुरता करत खुमान के।।

साधक  सुर   संगीत , करत   हन  तोरे सुरता।
छेड़स  सुर  संगीत , पहिर   के धोती   कुरता।
लोककला   के भीष्म , सबे झन कहिथे तोला।
अमर  रबे   खुमान , भले   तैं   तज दे   चोला।
सेवा   तोर  अमोल   बर , बार  बार जोहार  हे।
आबे   बन  संगीत तैं , इही  हमर   गोहार   हे।।

कलाकार   इंसान , सहज  अउ   सीधा साधा।
हृदय   बसे   संगीत , मनहुँ   मोहन  मन  राधा।
बाजे  बनके  नाल , कभू  बन   घुँघरू  खनके।
महकाये    सुर    साज , चँदैनी   गोंदा   बनके।
लोककला के शान अउ,आवस हमर गुमान जी।
श्रद्धांजलि संगीत गुरु ,सौ सौ नमन खुमान जी।।

छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम  - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899

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