छप्पय छंद मा ब्रह्मलीन संगीत साधक खुमान जी ला काव्यांजलि
रोवत तबला ताल , मोहरी कल्हरत हावै।
नाल हाल बेहाल , बाँसुरी कलपत हावै।
ढोलक टासक झाँझ , मांदरी गुन-गुन बोले।
हारमोनियम राग , बात अन्तस के बोले।
सुसकत जम्मों साज हा,लोककला के शान के।
ढारय आँसू मन हृदय , सुरता करत खुमान के।।
साधक सुर संगीत , करत हन तोरे सुरता।
छेड़स सुर संगीत , पहिर के धोती कुरता।
लोककला के भीष्म , सबे झन कहिथे तोला।
अमर रबे खुमान , भले तैं तज दे चोला।
सेवा तोर अमोल बर , बार बार जोहार हे।
आबे बन संगीत तैं , इही हमर गोहार हे।।
कलाकार इंसान , सहज अउ सीधा साधा।
हृदय बसे संगीत , मनहुँ मोहन मन राधा।
बाजे बनके नाल , कभू बन घुँघरू खनके।
महकाये सुर साज , चँदैनी गोंदा बनके।
लोककला के शान अउ,आवस हमर गुमान जी।
श्रद्धांजलि संगीत गुरु ,सौ सौ नमन खुमान जी।।
छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
No comments:
Post a Comment