शीर्षक : महतारी के मया
छंद : उल्लाला
दुनिया मा अनमोल जी , हे महतारी के मया।
अपन खुशी ला पाट के , देथे सुत सुख के पया।
राखे नौ दस माह ले , सहिके जोखिम लाख जी।
पाथे महतारी तभे , सुख के सुग्घर पाख जी।।
माता के करनी घलो , दीपक ज्योति समान हे।
रौशन कर संतान ला , करथे काज महान हे।।
मुरहा ला दे जिंदगी , करथे गा उद्धार हे।
जेकर छाती ले बहे , पावन अमरित धार हे।।
सच्चा जीवन दायिनी , माँ अमरित के खान हे।
कल्पवृक्ष के तुल्य अउ , कामद गाय समान हे।।
ममता करुणा अउ कहाँ , पाबे तैं इंसान रे।
जूझ काल के गाल माँ , तोर बचाथे जान रे।।
सदा झुकावौ शीश ला , महतारी के मान मा।
जग जननी माँ ले बड़े , भगवन नहीं जहान मा।।
रचनाकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा(राजिम)
जिला : गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
मो. 9993690899
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