Thursday, 27 June 2019

महतारी के मया छत्तीसगढ़ी उल्लाला छंद


शीर्षक : महतारी के मया
छंद : उल्लाला

दुनिया  मा अनमोल जी , हे  महतारी  के मया।
अपन खुशी ला पाट के , देथे सुत सुख के पया।

राखे नौ दस माह ले , सहिके जोखिम लाख जी।
पाथे   महतारी  तभे , सुख  के  सुग्घर पाख जी।।

माता के करनी घलो , दीपक ज्योति समान हे।
रौशन  कर  संतान ला , करथे काज  महान हे।।

मुरहा  ला   दे   जिंदगी , करथे   गा  उद्धार  हे।
जेकर  छाती  ले   बहे , पावन  अमरित धार हे।।

सच्चा जीवन दायिनी , माँ अमरित के खान हे।
कल्पवृक्ष के तुल्य अउ , कामद गाय समान हे।।

ममता  करुणा अउ कहाँ , पाबे  तैं   इंसान रे।
जूझ काल  के गाल माँ , तोर  बचाथे  जान रे।।

सदा  झुकावौ  शीश ला , महतारी  के मान मा।
जग जननी माँ ले बड़े , भगवन नहीं जहान मा।।

रचनाकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा(राजिम)
जिला : गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
मो. 9993690899

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