Thursday, 27 June 2019

मजदूर बर चार डाँड़

जेन मजदूर हवय उन  ला पता भी नइ हे,
कि आज विश्व मजदूर दिवस हे।
काबर ये माटी के मितान मनके किस्मत
छइहा मा बइठे मनखे के बस हे।।

तोर  ऊपर  कविता पढ़के  कई झन हा तरगे।
फेर तैहर  कइसे  भुख  अउ  प्यास  मा मरगे।
सबके महल तैं बनाए तोर बांटा झोपड़ी परगे।
सबला  सुख  देवइया  तोर  सुख  कहाँ  हरगे।।

तुमन  कवि  हौ  ता  करत हौ बढ़िया कविता।
हमला तो कहीं सोचन नी दे ये पेट एक बिता।
कहिबो ता होही हमरेच गा  सिरतोन  फधीता।
मेहनत  हमर रामायण हे  अउ आंसू हरे गीता।।

उल्लाला
श्रम के करथे आरती,जग मा जाँगर तोड़ के।
हिम्मत कर मजदूर हा , रख दिच नदियाँ मोड़ के।।

महल  अटारी  ला  बना , देथे  जे  सौगात मा।
बिते श्रमिक के जिंदगी , काबर कारी रात मा।।

मिहनत कर अँधियार मा,जग ला करे अँजोर गा।
त्यागी   गजब   महान  तैं,जै   जै  होवै   तोर गा।।

मैं मजदूर किसान हौं , मिहनत मोर मितान गा।
असल पसीना  गार के , लाहूँ  नवा  बिहान गा।।

कवि : विरेन्द्र कुमार साहू बोडराबांधा (राजिम)

No comments:

Post a Comment