आज के विषय :- *"ददा"*
ददा नीम के पेड़ जस , कड़वा जड़ फल पान।
देवय शीतल छाँव अउ , दवा रोग बर जान॥
ददा रहे ले सब रहे , होवय पूरा शौंक।
हो कतनो गलती तभो, कुकुर सकय नइ भौंक॥
ददा बनो दशरथ सरिस , सुत बर स्वारथ त्याग।
तुमन अपन संतान बर , छोड़व दारू भाँग॥
ददा - कृपा ले सब मिले , केरा आमा सेव।
इनकर जीयत ले अपन , शौक पूर्ण कर लेव॥
सुत अमीर बनगे भले , पर पैसा बर रोय।
ददा गरीब कमाय जब ,शौक पूर्ण तब होय॥
सुखी ददा दाई रखय , जब बेटा निज पास।
देवय तब ही देवता , धन वैभव पद खास॥
दाई ददा ल मानबो , जब देवी भगवान।
तभे यकीनन बन जही , हर घर सरग समान॥
रचना : विरेन्द्र कुमार साहू
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