Thursday, 27 June 2019

छप्पय छंद मा जल के महत्व

जल के महत्व बतावत छप्पय छंद मा रचना :-

तरिया    नरवा   बाँध , बचालौ   पानी  भइया।
रही    नीर    भण्डार , पार   तब  होही  नइया।
सबला    चाही    नीर , बचाये   बर  जिनगानी।
बूंद-बूंद     अनमोल , सहेजौ    निर्मल    पानी।  
कइथे जल ला जिंदगी,सब सुख के आधार जी।
जुगुत बनालौ आज ले,जल रक्षण कर डार जी।।

जल बिन जग सुनसान,समझ लौ खतम कहानी।
जीना  हे   दिन     चार , बचालौ  निर्मल  पानी।
पाके   दू  ठन आँख , बनौ  झन अँधवा कनवा।
गँवा  नहीं  जल व्यर्थ , मोल ला समझौ  मनवा।
एक  चीज   के  नाव हे,पानी जल अउ नीर जी।
देथे   जीवन  दान अउ , हरथे   सबके  पीर जी।।

सबे     लगावौ    पेड़ , जरूरी  जल  रक्षण बर।
करलौ कल के आज,सँगी बिलमौ झन क्षणभर।
चहुँ-खुँट  पेड़   लगाव , धरा ला हरियर  करलौ।
करिहौ झन नुकसान , कसम खा नरियर धरलौ।
पानी   धरती   भीतरी , होवत   कमती आज हे।
पेड़ लगइ तिहि पायके,अबड़  पुण्य के काज हे।।

छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम  - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899

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