जल के महत्व बतावत छप्पय छंद मा रचना :-
तरिया नरवा बाँध , बचालौ पानी भइया।
रही नीर भण्डार , पार तब होही नइया।
सबला चाही नीर , बचाये बर जिनगानी।
बूंद-बूंद अनमोल , सहेजौ निर्मल पानी।
कइथे जल ला जिंदगी,सब सुख के आधार जी।
जुगुत बनालौ आज ले,जल रक्षण कर डार जी।।
जल बिन जग सुनसान,समझ लौ खतम कहानी।
जीना हे दिन चार , बचालौ निर्मल पानी।
पाके दू ठन आँख , बनौ झन अँधवा कनवा।
गँवा नहीं जल व्यर्थ , मोल ला समझौ मनवा।
एक चीज के नाव हे,पानी जल अउ नीर जी।
देथे जीवन दान अउ , हरथे सबके पीर जी।।
सबे लगावौ पेड़ , जरूरी जल रक्षण बर।
करलौ कल के आज,सँगी बिलमौ झन क्षणभर।
चहुँ-खुँट पेड़ लगाव , धरा ला हरियर करलौ।
करिहौ झन नुकसान , कसम खा नरियर धरलौ।
पानी धरती भीतरी , होवत कमती आज हे।
पेड़ लगइ तिहि पायके,अबड़ पुण्य के काज हे।।
छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
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