नापाक पाक को खरी खोटी।
तुम नापाक उग्रवादी हमसे क्या टकराओगे।
देके धोखा कब तक तुम खैरियत मनाओगे।
हमसे तुम न टकराओ वीर ना तू कायर है।
आके आगे लड़ते जो क्षणमें मिट ही जाओगे।
पल में हो सफाचट तुम बार बार मत उछलो।
किस सुबह न जाने तुम हूर के पास जाओगे।
देश मेरा वीरों का , शौर्यवान हीरों का।
सूर्य तेज से जल कर खाक में मिल जाओगे।
दूध ही जो माँगें तुम हमने खीर दिया तुमको।
पर कपूत ऐसे तुम ममता को लजवाओगे।
याद कर बीती बातें , है औक़ात तेरी क्या।
याद गर वो आयें तो , शर्म से मर जाओगे।
वीरता हमारी तो तुमको जो पता ही है।
हाल ऐसा कर देंगे धूल में मिल जाओगे।
"वीर" तेरी हरकत से , है बहुत खफ़ा पापी।
ऐसी मौत मारेंगे , थाह भी न पाओगे।
ज्यादा इतराया ना कर मिट्टी में मिला देंगे।
इस जहां के नक्शे पर , फिर नज़र ना आओगे॥
गजलकार: विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम : बोड़राबांधा (राजिम)
जिला गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
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