Thursday, 27 June 2019

दाई उप्पर विविध छंद

दोहा

दाई  ददा   ल  मानबो  ,  जब   देवी भगवान।2
तभ्भे गौकी   बन जही , हर घर  सरग समान॥

सुखी  ददा दाई रखय , जब  बेटा  निज पास।2
देवै   तभ्भे     देवता , धन   वैभव  पद खास॥

छप्पय छंद
सौंहत   के   भगवान , ददा   दाई   ला  जानौ।2
सेवौ  साँझ  बिहान , बात  अउ  उनखर मानौ।
देथे   जीवन   दान , पियाके   दूध   ल    दाई।2
पाल-पोष  के    बाप , हरे    जम्मों   करलाई।
मिलथे मनवा  मान ले , सेवा  के  परिणाम हा।2
मातु पिता आशीष ले , बनथे  बिगड़े काम हा।।

छंद : उल्लाला
दुनिया  मा अनमोल जी , हे महतारी  के मया।2
अपन खुशी ला पाट के,देथे सुत सुख के पया।।

राखे नौ दस माह ले,सहिके जोखिम लाख जी।2
पाथे  महतारी  तभे , सुख  के सुग्घर पाख जी।।

माता के करनी घलो , दीपक ज्योति  समान हे।2
रौशन कर  संतान ला , करथे  काज  महान हे।।

लइका  ला   दे  जिंदगी , करथे मां  उद्धार जी।2
उनखर छाती मा बहे , पावन अमरित धार जी।।

सचमुच जीवन दायिनी,माँ अमरित के खान हे।2
कल्पवृक्ष के तुल्य अउ ,कामद गाय समान हे।।

ममता   करुणा अउ कहाँ , पाबे  तैं  इंसान रे।2
जूझ काल  के गाल माँ , तोर  बचाथे  जान रे।।

सदा  झुकावौ  शीश ला , महतारी के मान मा।2
जग जननी माँ ले बड़े ,भगवन नहीं जहान मा।।

दोहा
मीठा   बानी  ला समझ , सबले  बढ़िया  मंत्र।
बैरी    ला  हितवा  करे , अइसन   हे  ये  यंत्र।।

उल्लाला
हँस बतिया  सबसन  वीर तैं ,
                          झन रख रफटफ टोन जी।2
गउ कोन जनी कब आ जही ,1
                         यमराजा   के  फोन    जी।।2

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