दोहा
दाई ददा ल मानबो , जब देवी भगवान।2
तभ्भे गौकी बन जही , हर घर सरग समान॥
सुखी ददा दाई रखय , जब बेटा निज पास।2
देवै तभ्भे देवता , धन वैभव पद खास॥
छप्पय छंद
सौंहत के भगवान , ददा दाई ला जानौ।2
सेवौ साँझ बिहान , बात अउ उनखर मानौ।
देथे जीवन दान , पियाके दूध ल दाई।2
पाल-पोष के बाप , हरे जम्मों करलाई।
मिलथे मनवा मान ले , सेवा के परिणाम हा।2
मातु पिता आशीष ले , बनथे बिगड़े काम हा।।
छंद : उल्लाला
दुनिया मा अनमोल जी , हे महतारी के मया।2
अपन खुशी ला पाट के,देथे सुत सुख के पया।।
राखे नौ दस माह ले,सहिके जोखिम लाख जी।2
पाथे महतारी तभे , सुख के सुग्घर पाख जी।।
माता के करनी घलो , दीपक ज्योति समान हे।2
रौशन कर संतान ला , करथे काज महान हे।।
लइका ला दे जिंदगी , करथे मां उद्धार जी।2
उनखर छाती मा बहे , पावन अमरित धार जी।।
सचमुच जीवन दायिनी,माँ अमरित के खान हे।2
कल्पवृक्ष के तुल्य अउ ,कामद गाय समान हे।।
ममता करुणा अउ कहाँ , पाबे तैं इंसान रे।2
जूझ काल के गाल माँ , तोर बचाथे जान रे।।
सदा झुकावौ शीश ला , महतारी के मान मा।2
जग जननी माँ ले बड़े ,भगवन नहीं जहान मा।।
दोहा
मीठा बानी ला समझ , सबले बढ़िया मंत्र।
बैरी ला हितवा करे , अइसन हे ये यंत्र।।
उल्लाला
हँस बतिया सबसन वीर तैं ,
झन रख रफटफ टोन जी।2
गउ कोन जनी कब आ जही ,1
यमराजा के फोन जी।।2
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