सुत बर रखथे हरदम , अतना प्रीत।
बाप हार के सरबस ,जाथे जीत।।
पाट अपन सुख रखथे , सुत बर नेंव।
बाप असन अउ दानी , नइ देखेंव।।
जब कुरीति के बोहइस , तेज समीर।
सतमारग देखाइस , संत कबीर।।
रचना जेकर पबरित , अमरित नीर।
जीवन विद्या दाता , संत कबीर।।
दुख देके दूसर ला , करबे पाप।
करै नहीं जी रक्षा , मंतर जाप।।
पानी बिन मचगे हे , हाहाकार।
त्राहि त्राहि लोगन सब , होवत रार।।
मीठा बानी बोलौ , बड़ही प्यार।
इही बात जिनगी मा , हावै सार।।
मिलनसार मृदुभाषी , रख व्यवहार।
कतको होवै भाई , बँगला कार।।
व्रत तिहार के दिन ये , जानौ बात।
रिगबिग चंदा चमके , पुन्नी रात।।
शुक्ल पाख के अंतिम , उज्जर रात।
चंदा चमके चम-चम , जस सौगात।।
विरेन्द्र कुमार साहू
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