Thursday, 27 June 2019

बरवै छंद


सुत बर रखथे  हरदम , अतना   प्रीत।
बाप  हार    के  सरबस ,जाथे   जीत।।

पाट अपन  सुख रखथे , सुत बर नेंव।
बाप  असन  अउ   दानी , नइ  देखेंव।।

जब कुरीति के बोहइस  , तेज समीर।
सतमारग देखाइस  , संत कबीर।।

रचना जेकर पबरित , अमरित नीर।
जीवन  विद्या   दाता , संत   कबीर।।

दुख  देके  दूसर ला , करबे पाप।
करै  नहीं  जी रक्षा , मंतर  जाप।।

पानी  बिन  मचगे  हे , हाहाकार।
त्राहि त्राहि लोगन सब , होवत रार।।

मीठा  बानी  बोलौ , बड़ही    प्यार।
इही  बात  जिनगी  मा , हावै  सार।।

मिलनसार मृदुभाषी , रख व्यवहार।
कतको  होवै   भाई , बँगला   कार।।

व्रत तिहार के  दिन ये , जानौ  बात।
रिगबिग   चंदा   चमके , पुन्नी   रात।।

शुक्ल पाख के अंतिम , उज्जर रात।
चंदा चमके चम-चम , जस  सौगात।।

विरेन्द्र कुमार साहू

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