तिथि तीज शुक्ल बैशाख के , पावन दिवस विशेष हे।
हे राम तीसरा ख्यात जग , अक्षय अमित अशेष हे।।
तिथि शुक्ल तीज बैशाख के,महिमा अब्बड़ खास हे।
होइस गंगा अवतार अउ , करिस अन्नपूर्णा वास हे।।
बंदन कर ठाकुर देव के , करे किसानी ला शुरू।
ये रीत अक्ति बैशाख मा ,सबे निभाथे सुन भुरू।।
श्री परसु राम भगवान के , ख्याति अमित आकाश हे।
बैशाख तीज तिथि शुक्ल मा ,पावन जनम प्रकाश हे।।
जय देवी दाई शारदा , आये हँव दरबार मा।
आ झट उबार ले भगवती,भगत फँसे मँझधार मा।।
उही बात हा आ कथे ,उही बात हा जा कथे।
बोलव बात सँवार के , थोरिक सोच बिचार के।।
भागौ झन गा नाम बर , का राखे हे नाम मा।
बुध ला अपन सुधार के , ध्यान लगाले काम मा।।
विनय करँव गणराज हो , विघ्न हरण महराज हो।
करव सुफल सब काज ला , राखव हमरो लाज ला।।
रेंगव झन रसता गड़ी , सोचे बिन परिणाम ला।
बिना बिचारे झन करहु , जग के कोन्हों काम ला।।
जरगे सुनता राग मा , बैर भाव के आग मा।
छोड़ौ गरब गुमान ला , लानव नवा बिहान ला।।
जरत हवय सब जीव मन , करिया परगे चाम हा।
लाहो अस लेवत हवय , जेठ माह के घाम हा।
ढोलक धरके गाँव मा , नेता ढमढम ढम करय।
देहू मोला वोट कहि , जम्मो झन के पाँ परय।।
गदहा चले बरात मा , चिपो चिपो नरियात जी।
कोनो सुने न काखरो , देखावय औकात जी।।
गदहा चले बरात मा , चिपो चिपो नरियात जी।
कोनो सुने न काखरो , देखावय औकात जी।।
गंगा जी मा स्नान कर , मंदिर पूजे आय जी।
बेटा कइसन तैं हरस , दाई ददा सताय जी।।
लड़का लड़की मा कभू , करौ नहीं तुम भेद गा।
शिक्षित बनौ सुजान सब , मूंदौ जब्बर छेद गा।।
हँस बतिया सब सन वीर तैं , झन रख रफ टफ टोन जी।
गउ कोन जनी कब आ जही , यमराजा के फोन जी।।
जल जमीन जंगल बिना , कइसे जिये किसान हा।
लुटगे सब तब का करे , धरती के भगवान हा।।
साधु संत के चाल ला ,
करसी पानी मान गा।
दिखे बदन खदभूसड़ा ,
शीतल चरित सुजान गा।।
अब्बड़ हे जहिजात अउ , सोन भरे भंडार ता।
पुण्य कमाले थोरकुन , रख करसी बाजार मा।
जल भरके गरमी घरी ,
रख करसी चौपाल मा।
ईश्वर गाही तोर गुण ,
अउ खुश होही चाल मा।।
साधक : विरेन्द्र कुमार साहू
पानी भरके रोज दिन , रख करसी चौराह जी।
होय बड़ाई सब जगह , कहय सबे झन वाह जी।
छंदकार :-
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
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