Thursday, 27 June 2019

छत्तीसगढ़ी हास्य


पतरेंगी  अस  छोकरी , आये  रोज बजार।
अंतस  ओला  देख के , गाये  गीत  हजार।।

डर के मारे नइ कहँव , अपन हृदय के बात।
तभो समझ वो जाय जी , मोर सबे जज्बात।।

तूमा  भाँटा  ले  सजे , पसरा  लागे   नीक।
घेरी   बेरी  प्यार ले ,  बात करय सब ठीक।।

आवत जावत कहि परौं,का राखे हस हीर।
वोहर कहि  दे  हाँव ले , आई  लभ यू वीर।।

बड़ लजकुरहा आँव मैं , लागय मोला लाज।
बाजय गदकड़ गद तभो , एक सार के साज।।

मिर्चा  भाटा  संग  मा , लेवौं  रोज  पताल।
बइठौ पसरा मेर ता , अपन  बतावय  हाल।।

भरगे  पीरा  मूड़  मा , करम  फाटगे मोर।
सब्जी वाली छोकरी , कहिस हरौ मैं तोर।।

विरेन्द्र कुमार साहू

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