चारित्रिक सौंदर्य का , उदाहरण है राम।
श्रेष्ठ कार्य उपमान है , दो अक्षर का नाम।।
जिनसे संभव हानि हो , मत रख उनसे नेह।
पिस्सू पशु को त्याग दे , मृत जब उनकी देह।।
नभ मंडल में चाँदनी , फैली है चहुँओर।
लेकिन केवल चाँद पर , मोहित रहे चकोर।।
बुद्धि सुरक्षा के लिए , करो ईश का ध्यान।
तन की रक्षा के लिए , छोड़ नशे का पान।।
अडिग रहो निज लक्ष्य पर , मत होना भयभीत।
चलो सत्य की राह पर , होगी पक्की जीत।।
सबके मन को जीत लो , करके सबसे प्रीत।
प्यारे मन को जीतना , सबसे अच्छी जीत।।
कर्म सदा करते रहो , जीत मिले या हार।
लड़ने को हर बार ही , रहो सदा तैयार।।
जीवन के संघर्ष में , जीत मिले या मात।
किन्तु कभी ना छोड़ना , वीर सत्य का साथ।।
संघर्षों की राह में , झुक ना पाये माथ।
कोशिश तुम करते रहो , हार जीत विधि हाथ।।
विरेन्द्र कुमार साहू
मतदान पर दोहे :-
लोकतंत्र के जीत बर , देवौ संगी ध्यान गा।
लालच डर भय त्याग के , करौ सबे मतदान गा।।
तंत्र होय मजबूत अउ , होय समस्या दूर।
जब जनता भय त्याग के , वोट करे भरपूर।।
जनता के विस्वास मा , जेन करय नइ चोट।
सुग्घर राज सुराज बर , उही ल देवौ वोट।।
समय रहत पहिचान लौ, कोन नियत के खोट।
लबरा नेता ला कभू , झन देवौ गा वोट।।
गदगद होगे मोर मन , सुनके पन्ही पुरान।
पावत नेता मन घलो , रोज्जे साँझ बिहान।।
अपराधी के घेंच मा , लटकय जब तलवार।
लोकतंत्र के देश मा , मिटही भ्रष्टाचार।।
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