नशा नाश के मूल कहाथे , अब्बड़ येह खराब।
रोग लाय टीबी कैंसर अउ , सूगर बीपी दाब।।
हर मौसम बीमारी पावो , खाके गुटखा पान।
करौ खोखला अपने तन ला,पहुँचों झट शमशान।।
हल्ला-गुल्ला करय शराबी ,
पीके घात शराब।
होगे टीबी रोगी पगला ,
देदिस नशा जवाब।।
फँसके दारू चक्कर काका ,
तन बर नइ दिस ध्यान।
नशा नाश कर डारिस उनखर ,
पहुँचिस उन शमशान।।
एक बाप के अड़बड़ लइका ,
कलर-कलर घर-द्वार।
काम-बुता कुछु होय नहीं जी ,
हल्ला - गुल्ला सार।।
4.
हल्ला-गुल्ला माँचे हाबे ,
रोवत सकल जहान।
कोन्हों रोवत रोटी खातिर ,
कोन्हों बसन मकान।।
विरेन्द्र कुमार साहू बोडराबांधा राजिम
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