रानी दुर्गावती के गान बरवै छंद मा
कालिंजर के राजा , कीर्ति महान।
दुर्गावती सुकन्या , तेखर जान।।
शौर्य तेज साहस के , रहिस खदान।
दुर्गावती ह नारी , वीर महान।।
आश्रित जन के हरदम , टारे पीर।
रानी दुर्गा सचमुच , नारी वीर।।
राज गोड़वाना के , एक प्रदेश।
नाम रहय गढ़मँडला , ख्याति विशेष।।
वीर प्रतापी राजा , दलपत शाह।
दुर्गावती दुलौरिन , करिस विवाह।।
दलपत राजा तज दिस , असमय प्रान।
दुर्गावती चलाइस , राज कमान।।
जम्मों के हित करना , कारज एक।
कुआं बावली शाला , बनिस अनेक।।
मुगल करिस जब युद्ध म , राज्य प्रवेश।
भिड़गे दुर्गा धरके , नर के भेष।।
भुजा आँख टोंटा मा , लगगे तीर।
पाय वीरगति रानी , बनके वीर।।
मुगल युद्ध मा रानी , तज दिस प्रान।
विरांगना दुर्गा के , अमर निशान।।
छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
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