बतर बिषय मा सरसी छंद
हरियर-हरियर उलहा पाना ,
बरसा ऋतु जब आय।
पड़े बतर पानी धरती मा ,
महर - महर ममहाय।।
काखर खेती पटपर भाँठा ,
काखर हा गद खार।
तोला सबके आस पुरोना ,
बादर सुन गोहार।।
गरजत घुमड़त आबे बादर ,
बोंना हाबे धान।
आय बतर दिन जोहत हाबे ,
रद्दा तोर किसान।।
नाँगर बइला जोर चले अउ ,
अरिहा लउठी हाथ।
अरा-तता के गीत सुनावय ,
राग ददरिया साथ।।
झूम झमाझम बरसे बदरा ,
बोंये धनहा धान।
घात फसल लहराही कहिके ,
नाचत हवै किसान।।
छंदकार :-
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
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