वीर के दोहे :-
हरियर - हरियर पेड़ हा , नइ आवत हे रास।
हीरा - मोती गे गँवा ,पथरा करे विकास।।
हाथ-गोड़ ला काट के ,रूप ल अपन सजाय।
महल - अटारी तोड़ के , छानी खदर बनाय।।
अँध - विकास रफ्तार मा , चाला होगे भेड़।
ऊँच - नीच सोचे नहीं , काट सिराये पेड़।।
पानी नइहे जीव बर , टूटत हाबे साँस।
पेड़ काटके झन करौ , आँखी मूंद बिकास।।
समझौ माटी के दरद , करौ नहीं तुम पाप।
पेड़ काटके झन बनौं , आस्तीन के साँप।।
छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
No comments:
Post a Comment