परिचय वाला अभ्यास!
१.
साहू लक्ष्मण दाउ के , अँव मैंहा संतान।
दाई नाव भुनेश्वरी , सउहँत शक्ति समान॥
२.
हावव मैं बड़ भोकवा
निच्चट अड़हा मैं हवौं , हौं हासी के केंद्र।
रहिथौं राजिम क्षेत्र मा , हावय नाव विरेंद्र॥
३.
तेल पेरना आय जी , हम तेली सो काम।
जाँगर कनिहा तोड़ के , लेथन वाजिब दाम॥
४.
सेवा हे संस्कार बर , देथौं शिक्षा ज्ञान।
शिक्षक कवि के रूप मा,हवय मोर पहिचान॥
५.
करिया हाबे तन भले , मन के हावौं साफ।
गलती यदि कुछ हो जही,करहू मोला माफ॥
साधक : विरेन्द्र कुमार साहू
ढूंढ मिलेगा निश्चित तुम्हें , माँ के चरणों में स्वर्ग।
ना हो सच यदि यह बात तो , कायम कर देना मर्ग॥
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