विषय :- धन
विधा :- दोहा
हो यदि पाना चाहते , धन वैभव पद खास।
सुखी रखो माँ बाप को , बनकर उनके दास।।
धन जग में सब कुछ नहीं , है यह सच्ची बात।
लेकिन धन बल के बिना , कटे नहीं दिन रात।।
याचक को सुख दे सकूँ , धन हो इतना पास।
मेरे घर भी सुख रहे , करे शांति नित वास।।
सबको करना चाहिए , यथा शक्ति धन दान।
जिससे शोषित वर्ग का , हो जाये कल्याण।।
रखो गुप्त धन पास में , थोड़ा बहुत सहेज।
आये आफत की घड़ी , लाज बचाये तेज।।
रचनाकार :-
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (राजिम)
जिला - गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मो. - 9993690899
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