कैसे रेंगव मैं डगर , मुश्किल होगे ये सफर।
हावौं निच्चट डोकरा , मार डारही भोंभरा।।
उल्लाला
सोरठा :-
हरियर हरियर धान , झूमत हावय खेत मा।
आही नवा बिहान , सोचत हवय किसान हा।।
गुरमतिया के भात , मनला मोरे भात हे।
खाय म गजब सुहात , गुरतुर गुरतुर हे अबड़।।
संस्कृति अपन भुलाय , नोनी बाबू आज के।
अंग्रेजी बतियाय , नान-नान कपड़ा पहिर।।
झन करिहौ गा भेद , कपड़ा लत्ता देख के।
धोती रख दिस खेद , परदेशी सुट बूट ला।।
अपन बचालौ नाक , होय फधीता झन कहूँ।
पहिरौ गा पोषाक , देश काल अनुरूप मा।।
छंदकार :-
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
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