Thursday, 27 June 2019

छत्तीसगढ़ी सोरठा


कैसे  रेंगव मैं डगर , मुश्किल होगे ये सफर।
हावौं  निच्चट डोकरा , मार  डारही भोंभरा।।
उल्लाला

सोरठा :-

हरियर  हरियर  धान , झूमत हावय खेत मा।
आही नवा बिहान , सोचत हवय किसान हा।।

गुरमतिया  के  भात , मनला   मोरे   भात  हे।
खाय म गजब सुहात , गुरतुर गुरतुर हे अबड़।।

संस्कृति अपन भुलाय , नोनी बाबू आज के।
अंग्रेजी बतियाय , नान-नान  कपड़ा  पहिर।।

झन करिहौ गा भेद , कपड़ा लत्ता देख के।
धोती रख दिस खेद , परदेशी सुट बूट ला।।

अपन बचालौ नाक , होय फधीता झन कहूँ।
पहिरौ गा पोषाक , देश  काल  अनुरूप मा।।

छंदकार :-
                विरेन्द्र कुमार साहू
        ग्राम  - बोडराबांधा (पाण्डुका)
       वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
       छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
             

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