विषय :सद्गुरु
१.
सद्गुरु सम संसार में , दाता कहीं न और।
सद्गुरु ही भगवान है , सद्गुरु ही सिरमौर।।
२.
गुरु मिलता सौभाग्य से , हरि समान नवकार।
तन-मन-धन अर्पित करें , होंगे भव से पार।।
३.
केवल ही सद्गुरु कृपा , जग कल्याण निकाय।
ज्ञान मिले ना गुरु बिना , करलो लाख उपाय।।
४.
सद्गुरु की सेवा करो , समझ सकल सुर संत।
निर्मल सेवा से मिले , सद्गुरु कृपा अनंत।।
५.
निर्भय होकर सौंप दो , नौका कर नवकार।
चिंता फिर किस बात की , जब गुरु खेवनहार।।
रचनाकार :
नाम : विरेन्द्र कुमार साहू
पता : ग्राम बोड़राबांधा (राजिम)
मो. न. 9993690899
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