गजब हवय गोरी के नखरा ,
आँखी ला मटकाय।
अंतस के धुकधुक धड़कन ला
रहि-रहि के अटकाय।।
पिंयर पिंयर तन चमचम चमकत ,
मन ला मोर लुभाय।
चाल करेला करुवा कस्सा ,
तभ्भो मीठ जनाय।।
पतरेंगी लचकावत कनिहा ,
पनघट पनिया जाय।
देख गाँव के कतको टूरा ,
बइहा कस बौराय।।
आँखी आँखी झूलय गोरी ,
नींद घलो नइ आय।
अलथी कलथी मारौं रतिहा ,
सुरता गजब सताय।।
रचना :- विरेन्द्र कुमार साहू
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