करौ हिजगा पढ़ाई बर निभाई बर गढ़ाई बर।
रहो सुनता सुमत ले जी छोड़ौ बिनता बिनाशी गा।
बनावौ घर ल मंदिर तुम तीरथ गंगा औ काशी गा।
जियौं झन गा लड़ाई कर चढ़ाई कर बुराई कर।
करौ हिजगा पढ़ाई बर लिखाई बर गढ़ाई बर।।
निभाले तैं धरम खुद के करम करले अच्छाई के।
न कर लालच तैंहर भाई जगत मा निज बड़ाई के।
खड़े रहिबे तैं दमदम ले धरम रन मा लड़ाई बर।
करौ हिजगा पढ़ाई बर लिखाई बर गढ़ाई बर।।
मया करले जनम भुँइया मिले शीतल जिहा छइया।
मया कर गाँव गंगा ले परौ नित पाँव के पँइया।
मया माँ बाप भाई बर मया बहिनी औ बाई बर।
करौ हिजगा पढ़ाई बर लिखाई बर गढ़ाई बर।।
रचनाकार :
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम : बोड़राबांधा(राजिम)
जिला : गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
मो. 9993690899
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