आज के अभ्यास नारी बिषय मा सरसी छंद
जनम धरे पर के हित खातिर ,
जिनगी करे खुँवार।
कोन भला नारी कस त्यागी ,
साथी करौ बिचार।।
नारी बिन हो सकय नहीं गा ,
जग के चिटको काज।
देवौ उनला जम्मों मौका ,
बदलौ रूढ़ि रिवाज।।
नारी के परसादे ब्रह्मा ,
जग के रचय विधान।
नारी ले बाढ़े संसारी ,
नारी सृष्टि मितान।।
त्याग तपस्या जिनगी जेखर ,
जीथे जइसे संत।
नारी के महिमा अस गाहे ,
तुलसी कबिरा पंत।।
कभू रूप बेटी बहिनी के ,
कभू मयारुक मातु।
सबे रूप कल्याणी जइसे ,
मानों मँहगा धातु।।
दुनिया ला सुख देथे नारी ,
सहिके दुख भरमार।
चुका सकय नइ कोन्हों इनखर ,
कर्जा खाय अपार।।
मान करौ जी नारी मन के ,
करिहौ झन उपहास।
होही सरग बरोबर भुँइया ,
करही देव निवास।।
छंदकार :-
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899
No comments:
Post a Comment